चंडीगढ़ के मुद्दे पर पंजाब-हरियाणा आमने-सामने, मंत्री विज ने कहा-हिंदी भाषी क्षेत्र दो, सांसद बोलीं-चंडीगढ़ किसी की बपौती नहीं

चंडीगढ़ के मुद्दे पर पंजाब-हरियाणा आमने-सामने, मंत्री विज ने कहा-हिंदी भाषी क्षेत्र दो, सांसद बोलीं-चंडीगढ़ किसी की बपौती नहीं

चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा के लिए जमीन अलॉटमेंट को लेकर पंजाब और हरियाणा एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। पंजाब की सभी पार्टियों के नेता पूरे चंडीगढ़ पर अपना हक जता रहे हैं। तो वहीं हरियाणा के नेताओं ने भी अब जवाब में यहां तक कह दिया कि चंडीगढ़ किसी की बपौती नहीं है।

यहां तक की पंजाब-हरियाणा के बीजेपी नेता ही आमने-सामने आ गए हैं। पंजाब बीजेपी के प्रधान सुनील जाखड़ ने तो सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देकर जमीन की अलॉटमेंट रुकवाने की मांग की है। वहीं पंजाब की सत्ता पर आसीन आम आदमी पार्टी भी इसका पुरजोर विरोध कर रही है।

साथ ही अकाली दल और कांग्रेस भी चंडीगढ़ पर पंजाब के पूरे हक की बात कह रहे हैं।

चंडीगढ़ में हरियाणा को विधानसभा बनाने के लिए जमीन देने के मुद्दे पर पंजाब बीजेपी प्रधान सुनील जाखड़ ने सख्त नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ हमारे लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं,इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने पंजाब को अतीत में मिले घावों पर मरहम लगाने के कई प्रयास किए हैं, लेकिन हरियाणा को चंडीगढ़ में विधानसभा भवन के लिए अलग जगह अलॉट करने से लोगों को ठेस पहुंचेगी। उन्हें इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

आपको बता दें कि हरियाणा विधानसभा की नई बिल्डिंग बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 11 नवंबर को गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है। हरियाणा को चंडीगढ़ के IT पार्क के पास जमीन मिली है, ये एरिया पंचकूला से सटा हुआ है।

वहीं अब हरियाणा की तरफ से भी इस मामले में प्रतिक्रिया सामने आई है। हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान साहब कहते हैं कि चंडीगढ़ हमारा है, लेकिन चंडीगढ़ तुम्हारा तब है, जब तुम हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा को स्थानांतरित कर दोगे, जब हमें सतलुज यमुना लिंक का पानी दे दोगे, जब तक यह नहीं देते तब तक इसके ऊपर हमारा अधिकार है। हम चंडीगढ़ में तब तक बैठे हुए हैं, क्योंकि जो दोनों राज्यों के बीच समझौता हुआ है, पंजाब उसे लागू ही नहीं कर रहा है, तो चंडीगढ़ तुम्हारा कैसे हुआ?

अनिल विज ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि जिस वक्त पंजाब और हरियाणा अलग हुए, तो उस वक्त हरियाणा को इसमें यानी मौजूदा विधानसभा परिसर में एडजस्ट किया गया। अभी हरियाणा में 90 सदस्य हैं, परिसीमन होता है तो ऐसा अंदाजा है कि 120 सदस्य हो जाएंगे। लेकिन वर्तमान विधानसभा में 120 सदस्यों के बैठने की जगह नहीं है, और जगह चाहिए और इस संबंध में पहले से ही हमने यानी हरियाणा ने तैयारी कर दी थी।

वहीं बीजेपी सांसद किरण चौधरी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी है। यहां शुरू से ही हमारा 60:40 के अनुपात में हिस्सा था, उन्होंने कहा कि हमें तो वो भी नहीं मिला। हमने चंडीगढ़ को 12 एकड़ जमीन दी है और उसकी एवज में हमारी विधानसभा 10 एकड़ में बन रही है। मौजूदा बिल्डिंग को लेकर उन्होंने कहा कि इसमें काम नहीं हो सकता है। उसके लिए फ्यूचर प्लानिंग की जा रही है। पंजाब के बीजेपी प्रधान सुनील जाखड़ के बयान पर भी किरण चौधरी ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि ये उनकी राजनीतिक मजबूरी होगी, उन्हें पंजाब की बात करनी पड़ेगी।

उधर पंजाब के पूर्व मंत्री अनमोल गगन मान पहले ही कह चुकी हैं कि मामले में हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। और इस मामले में बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेंगे। जरूरत पड़ी तो धरने प्रदर्शन तक किए जाएंगे।

पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा बड़िंग का कहना है कि ऐसा करके केंद्र सरकार चंडीगढ़ पर उनका हक कमजोर करने की कोशिश में लगी हुई है।

वहीं शिरोमणि अकाली दल की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के हकों पर यह बहुत बड़ा डाका है। चंडीगढ़ पंजाब का है। 22 गांवों को उजाड़ कर चंडीगढ़ बना है। हरियाणा को हमने लीज पर अपनी इमारतें दी हुई हैं।अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवंत मान पंजाब के जब से सीएम बने हैं, तब से केंद्र सरकार पंजाब के हकों का हनन कर रही है।

बहरहाल नेताओं की इस बयानबाजी से ये जाहिर है कि अब ये मुद्दा कुछ दिनों तक पंजाब और हरियाणा की सियासी हवाओं में खूब गूंजता हुआ दिखाई देगा।