उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने स्कूलों और कॉलेजों में AI को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाने का किया आह्वान
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज कहा कि भारत समावेशी विकास और राष्ट्रीय परिवर्तन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आसपास नीतियों और मिशनों को आकार देने में विश्व स्तर पर सबसे सक्रिय देशों में से एक के रूप में उभरा है।
उपराष्ट्रपति ने यह बात नई दिल्ली में AI इवोल्यूशन पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव - AI के महाकुंभ को संबोधित करते हुए कही। श्री राधाकृष्णन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि AI स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग होना चाहिए और AI से शुरुआती परिचय छात्रों को क्रिटिकल थिंकिंग और समस्या-समाधान कौशल से लैस करेगा।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि AI देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 2047 तक आत्मनिर्भर, समावेशी और तकनीकी रूप से सशक्त विकसित भारत की ओर अपनी प्रेरणादायक यात्रा तय कर रहा है। उन्होंने कहा कि AI के प्रति देश का दृष्टिकोण समावेश, पहुंच और सामाजिक प्रभाव के स्पष्ट और सैद्धांतिक दृष्टिकोण से आकार ले रहा है।
श्री राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि 10 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक के बजट के साथ लॉन्च किया गया इंडिया AI मिशन, AI की शक्ति का उपयोग करने के लिए सरकार की मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि तकनीकी रूप से कुशल कार्यबल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की स्थिति में लाता है।
इस अवसर पर बोलते हुए, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, AI पहले से ही सीखने, सिखाने, मूल्यांकन, शासन और निर्णय लेने को बदल रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि AI शिक्षा के मानवीय उद्देश्य को बहाल करने के बारे में है। श्री सूद ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि AI को शिक्षकों को मज़बूत करना चाहिए और सीखने वाले को सशक्त बनाना चाहिए और सीखने के परिणामों में सुधार करना चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो पारंपरिक प्रणालियों से पीछे रह गए हैं।