केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने पश्चिम बंगाल के सांसदों से टीबी उन्मूलन के लिए जन-आंदोलन का नेतृत्व करने का आह्वान किया

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने पश्चिम बंगाल के सांसदों से टीबी उन्मूलन के लिए जन-आंदोलन का नेतृत्व करने का आह्वान किया

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित विस्तारित संसद भवन एनेक्सी में संसद के मानसून सत्र के दौरान पश्चिम बंगाल के सांसदों के साथ "टीबी मुक्त भारत के लिए सांसदों की पहल" विषय पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता की।। इस अवसर पर उनके साथ केन्द्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी उपस्थित रहे।

इस बैठक में पश्चिम बंगाल के विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोकसभा और राज्यसभा सांसद एक मंच पर आए, ताकि सशक्त राजनीतिक नेतृत्व और व्यापक सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयासों को और मजबूती मिल सके।  

यह बैठक केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और अन्य राज्यों के सांसदों के साथ आयोजित जन-जागरूकता एवं संवेदनशीलता बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा थी। श्री नड्डा ने सांसदों को अवगत कराया कि टीबी उन्मूलन में तेजी लाने के लिए सरकार के ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’(होल-ऑफ-गवर्नमेंट-अपरोच) के तहत अन्य राज्यों के सांसदों के साथ भी इसी प्रकार के परामर्श आयोजित किए जा चुके हैं।

इस बैठक में '100-दिन के टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई, जिसे टीबी उन्मूलन के भारत के प्रयासों को गति देने के लिए दो चरणों में लागू किया गया है। 7 दिसंबर 2024 को शुरू किए गए पहले चरण को शुरुआत में 347 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में लागू किया गया था, जिसे बाद में देशभर में विस्तारित किया गया और 24 मार्च 2025 को इसका समापन हुआ। 24 मार्च 2026 को शुरू किया गया दूसरा चरण देश भर के लगभग 1.58 लाख उच्च-जोखिम वाले गांवों और शहरी वार्डों पर केंद्रित था।

सभा को संबोधित करते हुए श्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस अभियान को "नवाचार, संवेदनशीलता और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति पर आधारित, देश की तपेदिक(टीबी) के विरुद्ध लड़ाई का एक निर्णायक क्षण" बतलाया। उन्होंने दोहराया कि टीबी मुक्त भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक टीबी का उन्मूलन करके सतत विकास लक्ष्य(एसडीजी) हासिल करना है।

भारत की उल्लेखनीय प्रगति के बारे में बात करते हुए श्री नड्डा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 12 प्रतिशत रही। इस प्रकार, टीबी के मामलों में कमी लाने की भारत की गति वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी रही है। उन्होंने आगे बताया कि भारत में टीबी उपचार का कवरेज दर 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो वैश्विक औसत 78 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह उपलब्धि वैश्विक टीबी नियंत्रण प्रयासों में भारत की अग्रणी भूमिका को दर्शाती है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि टीबी मुक्त भारत सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-सहभागिता पर आधारित एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन है। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता के लिए ‘जन-भागीदारी’ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बतलाया कि यह अभियान जनप्रतिनिधियों, सरकारों, नागरिक समाज और समुदायों के सामूहिक स्वामित्व के माध्यम से ही अपनी पूर्ण क्षमता हासिल कर सकता है।