चावल घोटाले में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को भी जांच में शामिल करे सीबीआई: सौरभ भारद्वाज

चावल घोटाले में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को भी जांच में शामिल करे सीबीआई: सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने चावल घोटाला मामले में सीबीआई से मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम भी जांच लिस्ट में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने सीबीआई को दी एक सप्लीमेंट्री शिकायत में यह मांग करते हुए कहा कि मनजिंदर सिंह सिरसा ने चावल खरीद को बार-बार मंजूरी दी। इसके बावजूद आरोपियों में उनका नाम नहीं है। उन्होंने सीबीआई से जरूरी दस्तावेज सुरक्षित करने की मांग भी की ताकि मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सबूतों से छेड़छाड़ न कर सकें। उन्होंने कहा कि यह घोटाला अनजाने में नहीं हुआ, बल्कि जानबूझ कर आपराधिक षडयंत्र रचा गया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निलंबित डिप्टी कमिश्नर ने लिखित जवाब में कहा है कि उसने मंत्री के दिशा निर्देश पर काम किया।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मंत्री प्रवेश वर्मा के मेरे खिलाफ झूठे मानहानि मामले में विफल होने के बाद, अब मनजिंदर सिंह सिरसा की बारी है कि वह भी एक झूठा और बेबुनियाद मानहानि का मुकदमा आजमाएं। मैंने 24 सितंबर 2026 को दिल्ली के गरीबों के लिए मिले 5 करोड़ किलो सब्सिडी वाले चावल को चुराकर एक निजी कंपनी को बेचने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआई को एक सप्लीमेंट्री शिकायत दी है।

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि मैंने इस चावल घोटाले में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की कथित संलिप्तता के पुख्ता दस्तावेजी सबूत दिए हैं और उनके अपने डिप्टी कमिश्नर अरुण झा ने विभाग को दिए अपने लिखित जवाब में कई बार उनका नाम लिया है। वह अधिकारी, जिसने अपने लिखित जवाब के अनुसार मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के निर्देश पर काम किया था, उसे तुरंत निलंबित कर दिया गया, लेकिन मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं और ये मानहानि के मामले हमें भाजपा सरकार की जवाबदेही तय करने से नहीं रोक सकते।

सीबीआई के निदेशक को लिखे गए एक पूरक शिकायत पत्र में सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि हम सीबीआई द्वारा एफसीआई, नेरामेक के कई अधिकारियों और निजी बिचौलियों के खिलाफ एफआईआर का स्वागत करते हैं। एफआईआर को देखने से एक गंभीर और स्पष्ट चूक का पता चलता है, जिसमें इस संस्थागत गबन के कथित मुख्य राजनीतिक सूत्रधार और सुविधा प्रदाता, दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को आरोपियों की औपचारिक सूची से बाहर रखा गया है। अधीनस्थ प्रशासनिक विंग को कानून द्वारा आरोपी बनाया गया है, फिर भी जिस कैबिनेट मंत्री ने कथित तौर पर इस काले बाजार की वाणिज्यिक पाइपलाइन को सक्रिय रूप से अधिकृत किया और बार-बार मंजूरी दी, वह अपने पद पर बना है और जांच को प्रभावित करने तथा महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने के लिए स्वतंत्र है। इसलिए, यह पूरक शिकायत मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के स्पष्ट, दस्तावेज-समर्थित आपराधिक कृत्यों को सीधे आपके रिकॉर्ड में रखने और चल रही आपराधिक जांच में उन्हें तत्काल आरोपी के रूप में शामिल करने की मांग के लिए दायर की गई है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की कथित सक्रिय मिलीभगत को स्थापित करने वाले अतिरिक्त विशिष्ट बिंदुओं के तहत आधिकारिक रिकॉर्ड और बयानों की गहन समीक्षा से पता चलता है कि यह कोई चूक नहीं थी, बल्कि मंत्री के सीधे मार्गदर्शन में एक जानबूझकर किया गया कथित आपराध लगता है। “रूटीन फॉरवर्डिंग” के बहाने का विभागीय खंडन करते हुए उन्होंने कहा है कि मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सार्वजनिक रूप से यह दावा करके अपना बचाव किया है कि उनके हस्ताक्षर केवल बाहरी राज्य के पीएसयू के अनुरोध को सामान्य रूप से “आगे बढ़ाने” के लिए थे। हालांकि, उनके अपने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का आधिकारिक रुख इस बचाव को पूरी तरह से खारिज कर देता है। विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से उनके लिखित समर्थन को एक निष्क्रिय फाइल मूवमेंट के रूप में नहीं, बल्कि एक बाध्यकारी प्रशासनिक सिफारिश के रूप में मानते हैं जिसने कार्यकारी विंग को एफसीआई के साथ संवाद के लिए कथित रूप से सीधे मजबूर किया।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि “दो-स्ट्राइक” सिद्धांत जानबूझकर मिलीभगत साबित करता है। प्रशासनिक रूप से यह माना जा सकता है कि एक लोक सेवक को बाहरी इकाई द्वारा एक बार गुमराह किया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अनजाने में फाइल आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, यह घोटाला दूसरी बार 4 मई 2026 को भी किया गया था। एक महीने से भी कम समय में, 31,000 मीट्रिक टन (3.1 करोड़ किलो) सब्सिडी वाला चावल बिना किसी वितरण डेटा, स्टॉक रिकॉर्ड या उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किए दिल्ली से पूरी तरह गायब हो गया। बिना ऑडिट की मांग किए दूसरे बार समान आवंटन पर हस्ताक्षर करना नौकरशाही की चूक के बजाय सक्रिय, गणना की गई आपराधिक मिलीभगत को साबित करता है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि संस्थागत दोहरा मापदंड और कमांड जिम्मेदारी के तहत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पहले ही कार्यकारी अधिकारी, अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा को निलंबित करके अवैधता को स्वीकार कर लिया है। यदि किसी अधीनस्थ अधिकारी को नीतिगत विचलन को लागू करने के लिए तत्काल निलंबन का सामना करना पड़ता है, तो वह वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री जिसने कानूनी रूप से उस पर चर्चा की और आदेश दिया, उसे आपराधिक मुकदमे से नहीं बचाया जा सकता है। कमांड जिम्मेदारी का सिद्धांत यह मांग करता है कि गैरकानूनी निर्देशों के स्रोत की जांच उसी गंभीरता से की जाए जिस तरह ईमेल पर किया गया।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चावल घोटाले की कार्यप्रणाली के तहत यह करोड़ों रुपए का घोटाला दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी मजदूरों और बिना राशन कार्ड वाले नागरिकों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने के लोक कल्याणकारी आख्यान के तहत संचालित किया गया। वास्तव में, यह अनिवार्य प्रतिस्पर्धी खुले बाजार के ई-टेंडर को दरकिनार करने का एक जानबूझकर किया गया डिजाइन था। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की व्यक्तिगत आपराधिक संलिप्तता कार्रवाई के तीन स्पष्ट चरणों के माध्यम से स्थापित होती है। ई-टेंडर नियम पुस्तिका को जानबूझकर अमान्य करने के तहत 7 जनवरी 2026 को, नेरामेक ने पारदर्शी बाजार नीलामी के बाहर 23.20 रुपए प्रति किलो की दर पर 31,000 एमटी चावल के बड़े पैमाने पर साप्ताहिक आवंटन की मांग करते हुए अपना प्रारंभिक अनुरोध दायर किया। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने महीनों तक पत्र को अपने पास रखा, और 8 अप्रैल 2026 को सीधे अपने विभाग को इसे अवैध बाईपास पर “सकारात्मक विचार” करने का प्रशासनिक निर्देश दिया। इस मंजूरी ने घोटाले को मानक वैधानिक सुरक्षा को तोड़ने की अनुमति दी।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि “ऑफ-फाइल” ब्लैक मार्केट पाइपलाइन के सीधे पर्यवेक्षण के तहत, मंत्री के निर्देश के बाद, उनके तत्काल अधीनस्थ, तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा (अब निलंबित) ने आधिकारिक फाइल प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह से दरकिनार किया। अरुण कुमार झा ने एफसीआई को डेस्क-टू-डेस्क अनधिकृत ईमेल के माध्यम से विशेष रूप से काम किया और अप्रैल-मई 2026 के दौरान शिपमेंट को निकालने के लिए फर्जी एनओसी जारी किए। इस परिमाण का एक अभियान, जिसमें करोड़ों रुपए और लाखों किलो अनाज राज्य से बाहर ले जाया गया, कैबिनेट मंत्री के सक्रिय पर्यवेक्षण, सुरक्षा और मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता है।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि बार-बार अपराध और निगरानी की जानबूझकर चूक के तहत, सार्वजनिक संसाधनों पर एक स्थायी टैप स्थापित करने का आपराधिक इरादा दूसरे लेनदेन से साबित होता है। 4 मई 2026 को, नेरामेक ने 31,000 एमटी के नए, समान साप्ताहिक आवंटन के लिए आवेदन किया। इस तथ्य के बावजूद कि पहले 3.1 करोड़ किलो चावल एक ही महीने के भीतर दिल्ली से बिना किसी कागज, वितरण लॉग, या वैधानिक उपयोगिता प्रमाण पत्र के भौतिक रूप से गायब हो गया था, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक भी विवरण की जांच किए बिना “सकारात्मक विचार” के लिए दूसरे अनुरोध पर हस्ताक्षर कर दिए। यह एक ब्लैक-मार्केट पाइपलाइन का सक्रिय आपराधिक संरक्षण है जिसने सार्वजनिक संसाधनों को निजी तिजोरियों में डाल दिया।

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि मीडिया में कोई उल्लेख नहीं, विभाग द्वारा कोई प्रेस विज्ञप्ति नहीं और कोई फोटो-ऑप नहीं हुआ। इस सरकार और इसके मंत्रियों के काम करने का सामान्य तरीका कोई छिपा नहीं है। यहां तक कि पेड़ लगाने जैसे छोटे कल्याणकारी कार्यों को भी सरकार और उसके मंत्रियों द्वारा मीडिया और सोशल मीडिया में बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जाता है। यह विश्वास नहीं किया जा सकता कि सरकार की 31000 एमटी चावल गरीबों के बीच वितरित करने की योजना थी और उसने सरकारी विज्ञापन या प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से किसी भी मीडिया में इसकी घोषणा नहीं की। ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्री ने जानबूझकर इस योजना के बारे में गोपनीयता बनाए रखी क्योंकि वे जानते थे कि यह चावल कभी गरीबों के बीच नहीं बांटा जाएगा, बल्कि इसे अवैध मुनाफा कमाने के लिए काले बाजार में बेचने के लिए खरीदा जा रहा था।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि ठोस साक्ष्य के आधार के रूप में, चल रही जांच में भारी सबूत हैं जो सीधे मंत्री के कार्यालय की ओर इशारा करते हैं। विभागीय अभियोग के तहत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अपने आधिकारिक कारण बताओ नोटिस के पैराग्राफ 10 में एफसीआई को की गई सिफारिशों को स्पष्ट रूप से “अवैध, अनधिकृत” और ओएमएसएस (डी) नीति दिशानिर्देशों का सीधा, गैरकानूनी हेरफेर कहा गया है। कार्यकारी अधिकारी द्वारा सीधे तौर पर फंसाने के तहत, सतर्कता शाखा को दिए अपने औपचारिक, लिखित जवाब में, निलंबित अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा ने मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का सात अलग-अलग बार नाम लिया। अरुण कुमार झा ने अपने स्वयं के हस्ताक्षर के तहत स्पष्ट रूप से कहा है कि एफसीआई को भेजे गए हर एक एनओसी ईमेल, प्रत्येक प्रसंस्करण निर्देश और सभी संरचनात्मक मंजूरी मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से विस्तृत व्यक्तिगत चर्चा और स्पष्ट प्रशासनिक निर्देशों के बाद ही निष्पादित किए गए थे।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सीबीआई जांच के विस्तार की तत्काल आवश्यकता है। सीबीआई की प्रारंभिक जांच ने मुख्य धोखाधड़ी को पहले ही साबित कर दिया है कि दिल्ली में गरीब परिवारों तक पहुंचने के बजाय, सब्सिडी वाले खाद्यान्न को डायवर्ट किया गया, निजी चैनल भागीदारों (जैसे मैसर्स उत्पालक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स, मैसर्स दिबेश कमर्शियल और मैसर्स सुपर ग्रेन्स) के माध्यम से भेजा गया और हरियाणा में व्यावसायिक संस्थाओं को सीधे दोगुनी कीमत (46 रुपए प्रति किलो) पर बेचा गया। इससे सरकारी खजाने को प्रति सप्ताह 13.67 करोड़ रुपए की तत्काल अवैध मूल्य सब्सिडी अंतर का नुकसान हुआ। अपने 22-सप्ताह के संचालन में कई करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक जांच जो ईमेल भेजने वाले मध्य-स्तर के अधिकारियों को गिरफ्तार करती है और उन पर मुकदमा चलाती है, जबकि उन ईमेल को भेजने का आदेश देने वाले कैबिनेट मंत्री को बचाती है, वह अधूरी और संरचनात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के पास मंत्रालय के प्राथमिक प्रशासनिक लॉग और डिजिटल संपत्तियों की कस्टडी है। उन्हें एफआईआर के दायरे से बाहर रखना मिलावट रहित सबूतों को इकट्ठा करने के लिए तत्काल खतरा प्रस्तुत करता है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एफआईआर के पंजीकरण और विभाग के शीर्ष से अपराध को जोड़ने वाले भारी सबूतों के प्रकाश में, मैं केंद्रीय जांच ब्यूरो से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह करता हूं। पहला, मंत्री की भूमिका की जांच की जाए। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से संबंधित सक्रिय मिलीभगत, आधिकारिक पद के दुरुपयोग और वित्तीय कोणों की पूरी तरह से जांच करने के लिए एफआईआर में चल रही आपराधिक जांच के दायरे का औपचारिक रूप से विस्तार किया जाए।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दूसरा, मंत्रालय के रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं। किसी भी विलोपन या छेड़छाड़ को रोकने के लिए जनवरी 2026 और जून 2026 की अवधि के लिए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री, जीएनसीटीडी के कार्यालय से सभी आधिकारिक फाइल रूटिंग लॉग, व्यक्तिगत कर्मचारी रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक ईमेल संचार को तुरंत छापा मार कर जब्त और सुरक्षित किया जाए।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि तीसरा, औपचारिक बयान दर्ज किए जाएं। निलंबित अधिकारी के कबूलनामे के बयान में नामित सभी व्यक्तियों से तत्काल हिरासत में पूछताछ या जांच की मांग की जाए ताकि छोटाले के करोड़ों रुपए के धन के डाउनस्ट्रीम ट्रेल का पता लगाया जा सके।