लखपत साहिब पर पुस्तक का लोकार्पण, संरक्षण के लिए सिख संगत ने जताया प्रधानमंत्री मोदी का आभार

लखपत साहिब पर पुस्तक का लोकार्पण, संरक्षण के लिए सिख संगत ने जताया प्रधानमंत्री मोदी का आभार
  • सिख संत समाज एवं जत्थेदारों ने अमृतसर में सांसद सतनाम सिंह संधू की पुस्तक 'गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब: सेवा और संरक्षण' का किया विमोचन
  • लखपत साहिब पर किताब का विमोचन, दुर्लभ सिख विरासत को बचाने की अपील।
  • सांसद सतनाम सिंह संधू की पुस्तक 'गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब: सेवा और संरक्षण' यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब के जीर्णोद्धार का देती है विवरण, यूनेस्को ने किया सम्मानित
  • सांसद सतनाम सिंह संधू की पुस्तक में गुरु नानक देव जी की दो उदासियों से लखपत साहिब का संबंध और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की भूमिका दर्ज। गुरुद्वारे के मूल स्वरूप को सहेजने के कार्य को यूनेस्को ने सम्मानित किया था।

अमृतसर, 5 नवंबर 2026 — राज्यसभा सांसद श्री सतनाम सिंह संधू की पुस्तक ‘गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब: सेवा और संरक्षण’ के लोकार्पण पर सिख संगत ने कच्छ के ऐतिहासिक गुरुद्वारे का मूल स्वरूप सहेजने में योगदान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में ज्ञानी रघबीर सिंह, प्रो. मनजीत सिंह और सिख संत समाज के प्रतिनिधियों ने पुस्तक का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर उपस्थित व्यक्तियों में पूर्व जत्थेदार, श्री अकाल तख्त साहिब और पूर्व प्रमुख ग्रंथी, सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर ज्ञानी रघबीर सिं; प्रो. (डॉ.) मंजीत सिंह, पूर्व जत्थेदार तख्त श्री केसगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब; गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब कच्छ, गुजरात के अध्यक्ष जुगराज सिंह; धर्म प्रचार कमेटी पंजाब (दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी) के चेयरमैन मंजीत सिंह भोमा, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के सदस्य चरणजीत सिंह कालेवाल; दमदमी टकसाल के भाई मोहकम सिंह; पंचायती अखाड़ा निर्मल के सचिव महंत जगतार, डॉ. हरपाल सिंह पन्नू, गुरु नानक अनुसंधान अध्यक्ष, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, सिख विद्वान, बाबा कश्मीर सिंह भूरी वाले बाबा जी; जत्थेदार दविंदर सिंह नामधारी, जुगराज सिंह मझैल, अध्यक्ष, यूनाइटेड सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (यूएसएसएफ), वेद महंत अमरीक सिंह, निर्मला संत, ज्ञानी गुरजंट  सिंह, सुल्तानपुर लोधी, बाबा मेजर सिंह, अमृतसर, संत बाबा तेजा सिंह, अध्यक्ष प्राचीन निर्मल टकसाल डेरा (निर्मल टकसाल डेरा)। गुरुसर खुड्डा), बाबा गुरपिदनेर सिंह, सतलानी साहिब वाले और प्रोफेसर अमर सिंह, प्रमुख, गुरु नानक अध्ययन विभाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी सहित अन्य शामिल थे।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं पुस्तक के लेखक सतनाम सिंह संधू ने कहा, कि लखपत साहिब में गुरुद्वारे का मूल स्वरूप सहेजना और करतारपुर साहिब गलियारे के जरिए संगत के लिए दर्शन का मार्ग खोलना, दोनों पहलें सिख विरासत को दी गई प्राथमिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने इन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘विरासत भी, विकास भी’ की सोच से जोड़ा। गुरुद्वारा श्री नानक दरबार लखपत साहिब सिख समुदाय के लिए अत्यंत आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व रखता है।  यह उन दुर्लभ गुरुधामों में से एक है, जिन्हें श्री गुरु नानक देव जी की दो उदासियों के दौरान पावन स्पर्श प्राप्त हुआ। इस किताब  को लिखते समय जब मैंने इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे का दौरा किया, तो वहां संरक्षित दुर्लभ धरोहरों को देखकर मन भावुक हो गया। यहाँ गुरु नानक देव जी की चरण पादुकाएं (खड़ाऊं) के दर्शन उपलब्ध हैं। गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब का संबंध गुरु नानक देव जी के बड़े बेटे बाबा श्रीचंद जी से भी है, जिन्होंने 'उदासी' संप्रदाय की स्थापना की थी। यही कारण है कि यह गुरुद्वारा दुनिया भर के सिखों के लिए आस्था का केंद्र है। गुरुद्वारा श्री लखपत साहिब के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व को इस किताब में संकलित करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा सिख समुदाय के मान-सम्मान और गौरव के लिए प्रधानमंत्री मोदी के अथक प्रयासों का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। मेरी पुस्तक के माध्यम से दुनिया वर्ष 2001 में गुजरात में आए भूकंप के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 41 लाख रुपये से अधिक का बजट से ऐतिहासिक गुरुद्वारे के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए किए प्रयास के बारे में जानेंगे। उनके इन प्रयासों को वर्ष 2004 में यूनेस्को द्वारा गुरुद्वारा लखपत साहिब को यूनेस्को एशिया-पैसिफिक हेरिटेज कंजर्वेशन अवार्ड प्रदान कर मान्यता दी गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री मोदी का सिख समुदाय के साथ विशेष जुड़ाव है। उन्होंने सिख मूल्यों, संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। करतारपुर कॉरिडोर खोलने, 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने, लंगर को जीएसटी से छूट देने और छोटे साहिबजादों की शहादत को सम्मान देने जैसे कदमों के माध्यम से उन्होंने सिख समुदाय के लंबे समय से जुड़े मुद्दों का समाधान किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सिख गुरुओं के प्रकाश पर्वों को भव्य वैश्विक आयोजनों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाकर उनकी शिक्षाओं का विश्वभर में प्रचार किया है। ये सभी पहल गुरु साहिबानों की शिक्षाओं के प्रति उनके सम्मान और सिख संगत के प्रति उनके स्नेह को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब और अमृतसर के विकास के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। इनमें लगभग 76 करोड़ रुपये की प्रसाद एवं हृदय योजनाएं, आदमपुर-नांदेड़ सीधी उड़ान, वंदे भारत ट्रेनें, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, 'गुरु कृपा यात्रा' ट्रेन सेवा और 502 करोड़ रुपये की लागत से अमृतसर रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण शामिल हैं। इन प्रयासों से सिख श्रद्धालुओं की यात्रा और सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिली है। उन्होंने पाकिस्तान में मौजूद ऐतिहासिक गुरुद्वारों की खराब हालत पर भी चिंता जताई, जिन्हें तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। साथ ही, उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह से जुड़ी जगहों, रिकॉर्ड्स और कलाकृतियों को संरक्षित करने का भी आह्वान किया।

पुस्तक में 2001 के गुजरात भूकंप के बाद लखपत साहिब के संरक्षण में श्री नरेंद्र मोदी की भूमिका का उल्लेख है। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। सिख संगत, संरक्षण विशेषज्ञों और पारंपरिक कारीगरों की भागीदारी से हुए इस कार्य को यूनेस्को ने 2004 के एशिया-प्रशांत सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पुरस्कारों में ‘अवॉर्ड ऑफ डिस्टिंक्शन’ से सम्मानित किया। गुरुद्वारा लखपत साहिब समिति के अध्यक्ष भाई जुगराज सिंह राजू के माध्यम से गुजरात को एक प्रशंसा पत्र भी भेजा गया।

स्वराज पब्लिकेशन से पंजाबी और हिंदी में प्रकाशित पुस्तक लखपत साहिब का गुरु नानक देव जी की दो उदासियों (आध्यात्मिक यात्राओं) से संबंध दर्ज करती है। भाई जुगराज सिंह राजू के अनुसार, यह इस गुरुद्वारे के इतिहास और संरक्षण को समर्पित पहली पुस्तक है। समारोह में उन्हें ‘सिख विरासत सेवा संभाल सम्मान’ प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब के कारीगरों ने पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल कर गुरुद्वारे का मूल स्वरूप सहेजने में योगदान दिया।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के रूप में सेवा दे चुके ज्ञानी रघबीर सिंह ने पुस्तक को देश की प्रमुख भाषाओं में प्रकाशित करने का सुझाव दिया, ताकि अधिक से अधिक युवा लखपत साहिब के इतिहास से परिचित हो सकें। उन्होंने सिख रेफरेंस लाइब्रेरी की ऐतिहासिक पांडुलिपियों, हुक्मनामों और दस्तावेजों की वापसी का मुद्दा संसद में उठाने के लिए श्री संधू के प्रयासों की सराहना की। प्रो. मनजीत सिंह ने कहा कि भूकंप के बाद गुरुद्वारे का मूल स्वरूप सहेजना विरासत संरक्षण की मिसाल है और यह पुस्तक युवाओं को सिख गुरुओं से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के बारे में जानने के लिए प्रेरित करेगी।

संधू ने कहा कि 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान श्री हरमंदिर साहिब परिसर की सिख रेफरेंस लाइब्रेरी को पहुंचा नुकसान सिख विरासत के लिए अपूरणीय क्षति थी। उन्होंने उन पांडुलिपियों, हुक्मनामों और दस्तावेजों की तलाश पर जोर दिया, जिनका अब तक पता नहीं चला है। उन्होंने पाकिस्तान के ऐतिहासिक गुरुद्वारों की स्थिति पर भी चिंता जताई और महाराजा रणजीत सिंह से जुड़े स्थलों, अभिलेखों और ऐतिहासिक वस्तुओं को सहेजने का आह्वान किया।